
विशेष रिपोर्ट: AIRF और रेलवे बोर्ड के बीच दो दिवसीय PNM बैठक की कार्यवाही और प्रमुख निष्कर्ष- Cadre Restructuring पर Latest
- Date of Posting
- 27 September 2026
- Applies to
- All states
विशेष रिपोर्ट: AIRF और रेलवे बोर्ड के बीच दो दिवसीय PNM बैठक की कार्यवाही और प्रमुख निष्कर्ष- Cadre Restructuring पर Latest
1. बैठक का परिचय एवं संदर्भ
रेलवे बोर्ड और ऑल इंडिया रेलवेमेन फेडरेशन (AIRF) के मध्य आयोजित दो दिवसीय स्थायी वार्ता तंत्र (Permanent Negotiating Machinery - PNM) की बैठक रेलकर्मियों के हितों के संरक्षण की दिशा में एक अति-संवेदनशील एवं रणनीतिक घटनाक्रम है। इस उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता में रेलकर्मियों के ज्वलंत मुद्दों को AIRF के महामंत्री कॉमरेड शिव गोपाल मिश्र द्वारा अत्यंत मुखरता और प्रशासनिक दृढ़ता के साथ प्रस्तुत किया गया। यह बैठक प्रशासन और श्रम संघ के बीच लंबित नीतिगत निर्णयों के निस्तारण और रेल संचालन में संलग्न कार्मिकों की कार्यदशाओं में सुधार हेतु एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरी है।
2. मुख्य वित्तीय मुद्दे और मांगें (TA, OT और एरियर)
बैठक के दौरान वित्तीय विसंगतियों और लंबित भुगतानों पर गहन तकनीकी चर्चा हुई। AIRF ने स्पष्ट किया कि वित्तीय लाभों में विलंब रेलकर्मियों के मनोबल को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। निम्नलिखित तालिका में प्रमुख वित्तीय मांगों और अपेक्षित प्रशासनिक कार्रवाई का विवरण दिया गया है:
मद (Item) | AIRF का सुदृढ़ पक्ष (Stance) | अपेक्षित प्रशासनिक समाधान |
|---|---|---|
यात्रा भत्ता (TA) | लंबे समय से लंबित यात्रा भत्ते के दावों का शत-प्रतिशत और अविलंब भुगतान सुनिश्चित किया जाए। | रेलवे बोर्ड द्वारा अतिरिक्त बजट का मदवार आवंटन (Item-wise allocation) और जोनल स्तर पर तत्काल भुगतान आदेश। |
ओवरटाइम (OT) | अतिरिक्त कार्य घंटों के लिए देय 'ओवरटाइम भत्ते' का भुगतान बिना किसी कटौती के नियमित अंतराल पर हो। | संयुक्त प्रक्रिया आदेश (JPO) के माध्यम से गणना प्रणालियों को सरल बनाना और बकाया राशि का समयबद्ध निस्तारण। |
एरियर भुगतान | सातवें वेतन आयोग (7th CPC) एवं अन्य विसंगतियों से संबंधित बकाया एरियर का भुगतान प्राथमिकता पर हो। | प्रशासनिक फाइलों का त्वरित निस्तारण और रेलवे बोर्ड द्वारा संबंधित विभागों को सख्त अनुपालन हेतु निर्देश। |
3. ट्रैकमेन सुरक्षा और कार्यदशा
यद्यपि बैठक में अनेक तकनीकी पहलुओं पर चर्चा हुई, AIRF ने 'ट्रैकमेन सुरक्षा' को एक उच्च-स्तरीय एजेंडा मद के रूप में प्रस्तुत किया। फेडरेशन का स्पष्ट मत है कि ट्रैक पर कार्य करने वाले कर्मियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इस संबंध में प्रस्तावित प्राथमिक मांगें निम्नलिखित हैं:
शून्य दुर्घटना लक्ष्य: ऑन-ड्यूटी सुरक्षा मानकों का कड़ाई से अनुपालन और दुर्घटना की स्थिति में प्रशासन की सीधी जवाबदेही।
कार्यदशाओं में सुधार: कठिन भौगोलिक और मौसमी परिस्थितियों में कार्य करने वाले ट्रैकमेन के लिए आवश्यक विश्राम और सुरक्षा प्रोटोकॉल का क्रियान्वयन।
सुरक्षा उपकरण: सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक शिथिलता को समाप्त करना।
4. कैडर रिस्ट्रक्चरिंग (Cadre Restructuring) और पदोन्नति
प्रमुख मांग: पदोन्नति में गतिरोध (Stagnation) की समाप्ति और संवर्ग पुनर्गठन
AIRF ने कैडर रिस्ट्रक्चरिंग के मुद्दे पर रेलवे बोर्ड का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया कि विभिन्न श्रेणियों में कर्मचारी एक ही पद पर वर्षों से कार्यरत हैं। 'पदोन्नति में गतिरोध' (Stagnation) न केवल व्यक्तिगत विकास को बाधित करता है, बल्कि संगठनात्मक दक्षता को भी कम करता है। फेडरेशन की प्रमुख मांग है कि संवर्गों का वैज्ञानिक आधार पर पुनर्गठन किया जाए ताकि प्रत्येक रेलकर्मी को एक निश्चित समय सीमा के भीतर करियर प्रगति और उच्चतर वेतनमान का लाभ प्राप्त हो सके। इसे एक अनिवार्य नीतिगत सुधार के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
5. अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक मुद्दे
बैठक में प्रशासनिक तंत्र की संवेदनशीलता और जवाबदेही पर विशेष बल दिया गया। AIRF नेतृत्व ने बोर्ड को सचेत किया कि द्विपक्षीय बैठकों में लिए गए निर्णयों का जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन अत्यंत धीमा है। प्रशासन से यह अपेक्षा की गई है कि वे केवल आश्वासन तक सीमित न रहकर, नीतिगत निर्णयों को 'रेलवे बोर्ड पत्र' (Railway Board Letters) के रूप में शीघ्र जारी करें ताकि निचले स्तर के कर्मचारियों को उनका लाभ मिल सके।
6. निष्कर्ष और भविष्य की रूपरेखा
यह दो दिवसीय PNM बैठक रेलवे प्रशासन के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि रेलकर्मियों के धैर्य को उनकी कमजोरी न समझा जाए। यद्यपि वार्ता का वातावरण तर्कसंगत रहा, किंतु AIRF ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि TA, OT, एरियर और कैडर रिस्ट्रक्चरिंग जैसे गंभीर मुद्दों पर निर्धारित समय सीमा के भीतर ठोस परिणाम नहीं मिले, तो संगठन 'औद्योगिक अशांति' (Industrial Unrest) की दिशा में कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। कॉमरेड शिव गोपाल मिश्र के नेतृत्व में फेडरेशन ने अपनी भावी रणनीति के तहत कार्य बहिष्कार और व्यापक विरोध प्रदर्शनों के विकल्प खुले रखे हैं। रेलवे बोर्ड को अब यह सिद्ध करना होगा कि वह अपने कर्मचारियों की जायज मांगों के प्रति कितना गंभीर है।
